Sharad Mishra

Thursday, May 17, 2018

ज़िंदगी

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ज़िन्दगी से लम्हे चुरा, बटुए मे रखता रहा! फुरसत से खरचूंगा, बस यही सोचता रहा। उधड़ती रही जेब, करता रहा तुरपाई फिसलती रही खुशियाँ, करता रहा ...
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Monday, April 9, 2018

हिदी शायरी

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हम लोग भी कितने अजीब है... निशानियाँ तो महफूज रखते है और लोगों को खो देते है। वो दुश्मन बनकर मुझे जीतने निकले थे, दोस्ती कर लेते तो मैं ख...
Sunday, April 1, 2018

अकेले है वो...

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अकेले हैं वो और झुँझला रहे हैं मिरी याद से जंग फ़रमा रहे हैं ये कैसी हवा-ए-तरक़्क़ी चली है दिए तो दिए दिल बुझे जा रहे हैं
Saturday, March 17, 2018

काश...

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मैं उस समय मे वापस जाना चाहता हूँ.... 👉जहां ड्रिंक का मतलब सिर्फ "रसना" था 👉जहाँ सिर्फ "पापा" ...
Friday, March 16, 2018

मेरी सोच...

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जहां कदर नहीं वहां जाना नहीं। जो पचता नहीं, वो खाना नहीं। जो सत्य पर रूठे उसे, मनाना नहीं जो नज़रों से गिरे, उसे उठाना नहीं। मौसम सा जो ...
Saturday, February 17, 2018

ख्वाब

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दुनिया इक परिवार बताया जाता है। अक्सर इन्सां तनहा पाया जाता है। रब्तो-रक़ाबत दुनियादारी रँगरलियां, लेकिन अपना साथ न साया जाता है। आँखों द...

सोचा ना था...

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बोतल मे रखी शराब सुख जाएगी, सोच ना था. पर बोतल से बदबू नही जाएगी ,सोचा ना था। पैरो मे पड़े छाले सूख जाएगा , सोच ना था। पर निशान नही जाएगा...
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