Sharad Mishra

Saturday, February 17, 2018

ख्वाब

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दुनिया इक परिवार बताया जाता है। अक्सर इन्सां तनहा पाया जाता है। रब्तो-रक़ाबत दुनियादारी रँगरलियां, लेकिन अपना साथ न साया जाता है। आँखों द...

सोचा ना था...

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बोतल मे रखी शराब सुख जाएगी, सोच ना था. पर बोतल से बदबू नही जाएगी ,सोचा ना था। पैरो मे पड़े छाले सूख जाएगा , सोच ना था। पर निशान नही जाएगा...
Thursday, November 9, 2017

हम भारत एक बनायेगे

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तुम जितना कीचड़ डालोगे हम उतने कमल खिलाएंगे। तुम जाती विभाजन में लगे रहो, हम भारत एक बनायेंगे।। तुम घोटालों के बादशाह, हम भारत स्वच्छ बनाएं...
Monday, September 4, 2017

थोडा थक गया हूँ

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थोडा थक गया हूँ, दूर निकलना छोड दिया है। पर ऐसा नही है,की मैंने चलना छोड दिया है।।      फासले अक्सर रिश्तों में,      दूरी बढ़ा देते है...
Saturday, September 2, 2017

बचपन

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बचपन लौट के नही आता। जब भी ढूँढा यादों में पाता॥ बचपन के अजब रंग थे । दोस्त और मस्ती के संग थे॥ आम के पेड़ अमरूद की डाली । बेरों के कां...
Monday, August 21, 2017

पुराने शहरों के मंज़र

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पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं ज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर में मगर यहाँ भी समन्दर नि...
Sunday, August 20, 2017

सब दोस्त थकने लगे है.

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दोस्त अब थकने लगे है किसीका पेट निकल आया है, किसीके बाल पकने लगे है... सब पर भारी ज़िम्मेदारी है, सबको छोटी मोटी कोई बीमारी है। दिनभर ज...
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