Tuesday, March 15, 2011

Kyo rakhhoon main ab . . .

क्यूं रखूं मैं अब अपनी कलम में स्याही , 

जब कोई अरमान दिल में मचलता ही नहीं , 

जाने क्यूं सभी शक करते हैंमुझ पर ,

जब कोई सूखा फूल मेरी किताबों में मिलता ही नहीं , 

कशिश तो बहुत थी मेरी मोहब्बत में , 

मगर क्या करूँ कोई पत्थर दिल पिघलता ही नहीं , 

खुदा मिले तो उससे अपना प्यार मांगू ,

पर सुना है वो भी मरने से पहले किसी से मिलता ही नहीं.......

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