Sharad Mishra
Saturday, August 27, 2016
bachpan wala sunday
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*बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता* 90 का दूरदर्शन और हम - 1.संडे को सुबह-सुबह नहा-धोकर टीवी के सामने बैठ जाना.. 2."रंगोली...
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छुप छुप के कही पोस्ट मेरी पढती होगी
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छुप छुप के कही पोस्ट मेरी पढती होगी, मेरी तस्वीरों से तंहाई मे लड़ती होगी , जब भी मेरी याद उसे आती होगी, लगता है अब भी वो रो पड़ती होगी.......
Wednesday, June 1, 2016
Ek shakhs tha
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हकीकत में नहीं अक्सर ख्वाबों में ही आता था, एक शख्स था, सवाल सा, जवाबों में ही आता था। उसका रिश्ते निभाने का एक अजब ही लहजा था, रिश्ता व...
Wednesday, May 18, 2016
Meri Maa
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आँखों में आँसू , होंठों पर दुआ, दरवाज़े पर इन्तज़ार करती मेरी माँ-- देखती है स्कूल जाते नन्हें बच्चों में मुझे अब भी, जानती हूँ कि बहुत...
Shadi ka mausam
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अभी शादी का पहला ही साल था, ख़ुशी के मारे मेरा बुरा हाल था, खुशियाँ कुछ यूं उमड़ रहीं थी, की संभाले नही संभल रही थी.. सुबह सुबह मैडम ...
Wednesday, July 30, 2014
Aahista chal Zindagi
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आहिस्ता चल ज़िन्दगी, अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है, कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है; रफ्तार में तेरे चलने से कुछ रूठ ग...
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Monday, May 5, 2014
Geeta Saar
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गीता सार: 1. क्यों व्यर्थ चिन्ता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा न पैदा होती है, न मरती है। 2. जो हुआ,...
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